Its Happens only In | आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया | India Hindi Lyrics Bollywood Song


Its Happens only In | आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया | India Hindi Lyrics Bollywood Song

Song – Its Happens only In India
Film – Pardesi Babu
Singer – Anand Raj Anand
Lyricist – Anand Raj Anand

Full Hindi Lyrics

जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया

जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन ३
हो माथे पे बिंदिया आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
आ आ आ आ आ
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
और अश्कों से अपने लिखाकर भेजे प्यार की चिठ्ठिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
अल्लाह ओ अल्लाह
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
जहाँ मजहब से ऊंचा है इंसान सारे एक सामान
अरे आंच नहीं है सांच को चाहे देख ले साड़ी दुनिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
शबरी के खाके बेर राम ने प्रेम की प्रथा चलायी २
मीरा ने पीकर जेहर का प्याला प्रीत की रीत निभायी
जहाँ प्रेम की धुन पे गोपियों संग नाचे कृष्णा कन्हैया
कहीं होता है रे भैया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
सावन के झूले कहीं पे बैसाखी के मेले २
लगता है खुद कुदरत इस धरती पे आकर खेलें
जहाँ मान से लोरी सुने बुना बच्चों को न आये निंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
प्रेम कहानी मेरे देश की एक से एक निराली
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
जहाँ रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
आ आ आ आ
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
और रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
जहाँ शिरीन और फरहाद के इश्क़ में बहिन दूध की नदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन ३
हो माथे पे बिंदिया आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
आ आ आ आ आ
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
और अश्कों से अपने लिखाकर भेजे प्यार की चिठ्ठिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
अल्लाह ओ अल्लाह
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
जहाँ मजहब से ऊंचा है इंसान सारे एक सामान
अरे आंच नहीं है सांच को चाहे देख ले साड़ी दुनिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
शबरी के खाके बेर राम ने प्रेम की प्रथा चलायी २
मीरा ने पीकर जेहर का प्याला प्रीत की रीत निभायी
जहाँ प्रेम की धुन पे गोपियों संग नाचे कृष्णा कन्हैया
कहीं होता है रे भैया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
सावन के झूले कहीं पे बैसाखी के मेले २
लगता है खुद कुदरत इस धरती पे आकर खेलें
जहाँ मान से लोरी सुने बुना बच्चों को न आये निंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
प्रेम कहानी मेरे देश की एक से एक निराली
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
जहाँ रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
आ आ आ आ
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
और रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
जहाँ शिरीन और फरहाद के इश्क़ में बहिन दूध की नदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन ३
हो माथे पे बिंदिया आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया
जाहं पाँव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
आ आ आ आ आ
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
जहाँ जुंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाए
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाये
और अश्कों से अपने लिखाकर भेजे प्यार की चिठ्ठिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
अल्लाह ओ अल्लाह
जहाँ दिन निकले सुनकर श्लोक कुंबानी और अजान
जहाँ मजहब से ऊंचा है इंसान सारे एक सामान
अरे आंच नहीं है सांच को चाहे देख ले साड़ी दुनिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
शबरी के खाके बेर राम ने प्रेम की प्रथा चलायी २
मीरा ने पीकर जेहर का प्याला प्रीत की रीत निभायी
जहाँ प्रेम की धुन पे गोपियों संग नाचे कृष्णा कन्हैया
कहीं होता है रे भैया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
सावन के झूले कहीं पे बैसाखी के मेले २
लगता है खुद कुदरत इस धरती पे आकर खेलें
जहाँ मान से लोरी सुने बुना बच्चों को न आये निंदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया २
प्रेम कहानी मेरे देश की एक से एक निराली
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
जहाँ रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
आ आ आ आ
जहाँ सोहनी ने महिवाल के खातिर अपनी जान गवाई
और रांझे ने हीर की इक पल न सही जुदाई
जहाँ शिरीन और फरहाद के इश्क़ में बहिन दूध की नदिया
आईटी हप्पेंस ओनली इन इंडिया…

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